॥ अंतरा 1 ॥
हमारो मुरली वारो श्याम।
बिन मुरली बनमाल चंद्रिका, नहिं पहचानत नाम॥
॥ अंतरा 2 ॥
गोप रूप वृंदावन चारी, ब्रज जन पूरन काम।
याही सौं हित चित बढ़ौ नित, दिन दिन पलछिन जाम॥
॥ अंतरा 3 ॥
नन्दीसुर गोवर्धन गोकुल बरसानो विश्राम।
नागरीदास द्वारिका मथुरा, इनसों कैसौ काम॥