॥ अंतरा 1 ॥
श्यामा प्यारी, कुंज बिहारी,
जय जय श्री हरिदास दुलारी।
श्यामा प्यारी कुंज बिहारी,
जय जय श्री हरिदास दुलारी।
॥ अंतरा 2 ॥
वृंदावन के राजा दोनों, श्याम राधे रानी।
चार पदारथ करत मजूरी, मुक्ति भरे जहां पानी।
॥ अंतरा 3 ॥
श्री राधा बरसाने वाली, प्यारी राधा वृषभानु दुलारी।
जय राधे राधे राधे राधे, जय जय श्री राधे।