॥ अंतरा 1 ॥
श्याम घन कब बरसोगे आए
श्याम घन कब बरसोगे आए
कब यह हृदय संताप मिटेगो
विरह निदाग निशा
कब मम मन मयूर रचेगो
उर आनंद न समाए
कब चित्त चातक चहक उठेगो
श्याम स्वाति जल
श्याम घन कब बरसोगे आए
॥ अंतरा 2 ॥
श्याम मिलन बिन कछु नहीं भावे
कछु नहीं मोहि सुहावे
श्याम मिलन रस ही सौ चौरस
जीवन में सरसाए
श्याम घन कब बरसोगे आए