॥ अंतरा 1 ॥
नाम है तेरा तारण हारा,
कब तेरा दर्शन होगा।
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर,
वो कितना सुंदर होगा।
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर,
वो कितना सुंदर होगा॥
॥ अंतरा 2 ॥
तुमने तारे लाखों प्राणी,
ये संतों की वाणी है।
तेरी छवि पर वो मेरे भगवन,
ये दुनिया दीवानी है।
भाव से तेरी पूजा रचाऊँ,
जीवन में मंगल होगा।
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर,
वो कितना सुंदर होगा।
वो कितना सुंदर होगा॥
॥ अंतरा 3 ॥
सुरवर मुनिवर जिनके चरणे,
निशदिन शीश झुकाते हैं।
जो गाते हैं प्रभु की महिमा,
वो सब कुछ पा जाते हैं।
अपने कष्ट मिटाने को तेरे,
चरणों का वंदन होगा।
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर,
वो कितना सुंदर होगा।
वो कितना सुंदर होगा॥
॥ अंतरा 4 ॥
मन की मुरादें लेकर स्वामी,
तेरे चरण में आए हैं।
हम हैं बालक तेरे चरण में,
तेरे ही गुण गाते हैं।
भव से पार उतरने को तेरे,
गीतों का संगम होगा।
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर,
वो कितना सुंदर होगा।
वो कितना सुंदर होगा॥
॥ अंतरा 5 ॥
ऐसी दया कर देना दाता,
निश्छल गुजरे ये जीवन।
रंग लगे नहीं कपट झूठ का,
हो पावन मेरा तन मन।
सेवा में तेरी ओ मेरे स्वामी,
भक्तिभाव अर्पण होगा।
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर,
वो कितना सुंदर होगा।
वो कितना सुंदर होगा॥
॥ अंतरा 6 ॥
नाम है तेरा तारण हारा,
कब तेरा दर्शन होगा।
जिनकी प्रतिमा इतनी सुंदर,
वो कितना सुंदर होगा।
वो कितना सुंदर होगा॥