॥ अंतरा 1 ॥
तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया।
जन्मों की प्यास थी जो, मैं सम्पन्न हो गया॥
तुझको अपना बनाके, मैं धन्य हो गया।
तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया॥
॥ अंतरा 2 ॥
कितने मिले अमीर यहाँ, कितने मिले गरीब।
पर आप मिल गये तो, धनवान हो गया॥
तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया।
जन्मों की प्यास थी जो, मैं सम्पन्न हो गया॥
॥ अंतरा 3 ॥
दुःख में तड़प रहा था प्रभु, मुद्दतों से मैं।
एक आपका सहारा, साकार हो गया॥
तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया।
जन्मों की प्यास थी जो, मैं सम्पन्न हो गया॥
॥ अंतरा 4 ॥
करना कभी ना दूर प्रभु, चरणों से आप।
चरणों के ही सहारे, मैं भव पार हो गया॥
तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया हूँ।
जन्मों की प्यास थी जो, मैं सम्पन्न हो गया॥
॥ अंतरा 5 ॥
तेरी शरण में आके, मैं धन्य हो गया।
जन्मों की प्यास थी जो, मैं सम्पन्न हो गया॥