॥ अंतरा 1 ॥
कई जन्मों से बुला रही हूँ, कोई तो रिश्ता जरूर होगा॥
नज़रों से नज़ारे मिला ना पायी, मेरी नज़र का कसूर होगा॥
॥ अंतरा 2 ॥
तुम्हीं तो मेरे मात पिता हो॥
तुम्हीं तो मेरे बंधु सखा हो॥
कितने ही नाते तुम संग जोड़े,
कोई नाता तो जरूर होगा।
कई जन्मों से बुला रही हूँ॥
॥ अंतरा 3 ॥
कभी भुलाते हो वृंदावन में॥
कभी भुलाते हो मधुवन में॥
अपने तो मैं रोज़ बुलाते,
मेरे घर भी आना जरूर होगा।
कई जन्मों से बुला रही हूँ॥
॥ अंतरा 4 ॥
तुम्हीं तो मेरे आत्मा हो॥
तुम्हीं तो मेरे परमात्मा हो॥
तुझी में रह कर तुझी से पर्दा,
पर्दा हटना जरूर होगा।
कई जन्मों से बुला रही हूँ॥
॥ अंतरा 5 ॥
आँखों में बस गई तस्वीर तेरी॥
दिल मेरा हो गया जागीर तेरी॥
दासी की बिनती तुम्हारे आगे,
दर्श दिखना जरूर होगा॥