॥ अंतरा 1 ॥
गुरुदेव दया करके, मुझको अपना लेना,
मैं शरण पड़ा तेरी, चरणों में जगह देना…
करुणानिधि नाम तेरा, करुणा दिखलाओ तुम,
सोये हुए भाग्यों को, हे नाथ जगाओ तुम,
मेरी नाव भँवर डोले, इसे पार लगा देना,
गुरुदेव दया करके, मुझको अपना लेना….
॥ अंतरा 2 ॥
तुम सुख के सागर हो, निर्धन के सहारे हो,
इस तन में समाये हो, मुझे प्राणों से प्यारे हो,
नित माला जपूँ तेरी, नहीं दिल से भुला देना,
गुरुदेव दया करके, मुझको अपना लेना….
॥ अंतरा 3 ॥
पापी हूँ या कपटी हूँ, जैसा भी हूँ तेरा हूँ,
घर बार छोड़ कर मैं, जीवन से खेला हूँ,
मैं दुःख का मारा हूँ, मेरा दुखड़ा मिटा देना,
गुरुदेव दया करके, मुझको अपना लेना….
॥ अंतरा 4 ॥
मैं सब का सेवक हूँ, तेरे चरणों का चेरा हूँ,
नहीं नाथ भुलाना मुझे, इस जग में अकेला हूँ,
तेरे दर का भिखारी हूँ, मेरे दोष मिटा देना,
गुरुदेव दया करके, मुझको अपना लेना….