॥ अंतरा 1 ॥
जाये बसे हो दूर ब्रिज में भेजत हो संदेशा,
हम गोपित नित राह तकत है सुख गये मोरे नैना,
वैरी पीर नही पहचाने, जाके कांटो लगे वही जाने,
॥ अंतरा 2 ॥
मोर मुकट वैजन्ती माला दीजियो उसको जाये,
कहियो अंसुवन जल सो यमुना खारी न हो जाये,
कोई भी मत अइयो समजाने जाके कांटो लगे वही जाने,
॥ अंतरा 3 ॥
छोड़ गये हो नन्द दुलारे राधा को सांवरियां,
श्यामा श्यामा रट ते रट ते हो गी मैं वन्वारियां,
पथराई मियाँ की अँखियाँ रे जाके कांटो लगे वही जाने