॥ अंतरा 1 ॥
मेरो मुख नीको, कि तेरो राधा प्यारी?
दरपन हाथ लिये नंद-नंदना, साची कहो वृषभानु-दुलारी।
॥ अंतरा 2 ॥
हम से कहो, तुम ही क्यों न देखो,
हम गोरी तुम श्याम बिहारी,
मेरो मुख जैसो चंदा उजियारो,
तुमरो मुख जैसे रैन अंधियारी,
॥ अंतरा 3 ॥
तेरो नयनन में मोटो-मोटो कजरा,
हमरे नयन में तुम बनवारी,
तुम तो नख पर गिरिवर धार्यो,
हम उर धारि रहे गिरधारी,
॥ अंतरा 4 ॥
सूर श्याम या छवि की शोभा,
इन नयनन सो टरत ना टारी।