॥ अंतरा 1 ॥
ऊधो मैइया कू सुनैयो तेरो लाला दु:ख पावै॥
कोऊ न मुख धोवै ताते जल, अचरा ना पोछ सम्हारै ।
माखन रोटी नाम न जानें,
कनुआ कह मोहि कोई न बुलावै ॥
॥ अंतरा 2 ॥
बाबानन्द अंगुरियां गहि नित पायन चलन सिखाबें ।
थको जान कनियां हसिं लेतौ,
धूरिपोछ हिय सौ लिपटावै॥ ऊधो…
॥ अंतरा 3 ॥
दूध पिवाय बड़ो हित करती, चुटिया गूंथ सिंहावै ।
नहाते बार गिरे जो मेरो,
सौसौ बार कुलदेव मनावै ॥ ऊधो…..
॥ अंतरा 4 ॥
आवें गोपी दैन उल्हानौ, एक चित्त नहीं लावै
सो सुख उद्धव या मथुरा में,
जननी बिन को लाड़ लड़ावै ॥ ऊधो ….
॥ अंतरा 5 ॥
वन में भूखौ जान कन्हैया, करि-करि छाक पठावै ।
हाथ जोड़ विनती कह दीजो,
रिणियां तेरौ श्याम कहावै ॥ ऊधो….