॥ अंतरा 1 ॥
मेरो मन लग्यो बरसाने में,
जहाँ विराजे राधा रानी,
मन हट्यो दुनियाँदारी से,
मन हट्यो दुनियाँदारी से,
जहाँ मिले खरा पानी,
॥ अंतरा 2 ॥
मुझे दुनियाँ से नही कोई काम,
मुझे दुनियाँ से नही कोई काम,
मैं तो रतु राधा राधा नाम,
मैं तो रतु राधा राधा नाम,
दर्शन करू सुबह शाम,
दर्शन करू सुबह शाम,
मेंरे मन में विराजे श्याम दीवानी,
जहाँ विराजे राधा रानी,
॥ मेंरो मन लग्यो बरसाने में..॥
॥ अंतरा 3 ॥
मेंरे मन में ना लगे कोई रंग,
मेंरे मन में ना लगे कोई रंग,
मैं तो रहूँ संतान के संग,
मैं तो रहूँ संतान के संग,
मेंरे मन में बढ़त उमंग,
मेंरे मन में बढ़त उमंग,
बरसाना वृीज की राजधानी,
जहाँ विराजे राधा रानी,
॥ मेंरो मन लग्यो बरसाने में..॥
॥ अंतरा 4 ॥
मुझे दुनियाँ से नही लेना देना,
मुझे दुनियाँ से नही लेना देना,
ये जगत है एक सपना,
ये जगत है एक सपना,
यहा कोई नही अपना,
यहा कोई नही अपना,
मेंरी अपनी ब्रषभान दुलारी,
जहाँ विराजे राधा रानी,
॥ मेंरो मन लग्यो बरसाने में..॥
॥ अंतरा 5 ॥
मेंरो मन लग्यो बरसाने में,
जहाँ विराजे राधा रानी,
मेंरो मन लग्यो बरसाने में,
जहाँ विराजे राधा रानी,
मन हट्यो दुनियाँदारी से,
मन हट्यो दुनियाँदारी से,
जहाँ मिले खरा पानी,
॥ मेंरो मन लग्यो बरसाने में..॥