॥ अंतरा 1 ॥
हमारो दान देजा री, दही बेचने वारी
हमारो दान देजा री, दही बेचने वारी।
नई अंगिया, नई साड़ी, मटुकिया शीश पे भारी,
चले तू चाल मतवारी, दही बेचने वारी।
हमारो दान देजा री, दही बेचने वारी...
॥ अंतरा 2 ॥
झुमक-झुक झूमती डोले, रसीले बैन मुख बोले,
ये घूंघट क्यों नहीं खोले, मरी जाए लाज की मारी।
हमारो दान देजा री, दही बेचने वारी।