मुख्य पृष्ठ / भजन / मोहन जाग हौ बलि जाई मोहन जाग हौ बलि जाई मोहन जाग हौ बलि जाई के सम्पूर्ण पावन बोल, अर्थ और भावार्थ। भजन के पावन बोल (Lyrics) मोहन जाग हौ बलि जाई।ग्वाल बाल सब द्वार ठाडे बेर वन की भई।।पीत पट कर दूर मुख ते, छाड दे अब सई।।अति आनंदित होत जशोमति, देखि दुति नित नई।।सूर के प्रभु दरश दीजै अरूण किरण छाई।।