॥ अंतरा 1 ॥
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना ॥
॥ अंतरा 2 ॥
तन मन जीवन श्याम का, श्याम हमारा काम,
रोम रोम में राम रहा, वो मतवाला श्याम,
इस तन में तेरे योग का, नहीं कोई ठिकाना,
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना ॥
॥ अंतरा 3 ॥
उधो इन असुवन को, हरी सम्मुख ले जाओ,
पूछे हरी कुशल तो चरणों में दीओ चढाओ॥
कहिओ जी इस प्रेम का, यह तुच्छ नजराना॥
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना ॥
॥ अंतरा 4 ॥
प्रेम डोर से बंधा रहा, जीवन का संयोग,
सुमिरन में डूबी रहे, यही हमारा योग,
कानन में गूंजता करे, वंशी का तराना,
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना ॥
॥ अंतरा 5 ॥
एक दिन नैन के निकट, रहते थे आठों याम,
अब बैठे हैं बिसार के, वो निष्ठुर श्याम,
कैसा वो जमाना था, और अब ये जमाना,
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना ॥
॥ अंतरा 6 ॥
हम प्रेम दीवानी हैं, वो प्रेम दीवाना है,
उधो हमें ज्ञान की, पोथी ना सुनाना ॥