॥ अंतरा 1 ॥
वृंदावन सांचो धन भैया।
कनककूट कोटिक लगि तजिये, भजिये कुंवर कन्हैया॥
॥ अंतरा 2 ॥
जहाँ श्रीराधा-चरन रैंनुकी, कमला लेति बलैया।
तिनि सँग गोपी नाँचती गावति, मोहन बेंनु बजैया॥
॥ अंतरा 3 ॥
कामधेनुकौ छीरसिंधु तजि, भजहुँ नंदकी गैया।
चार्यौं मुक्ति कहा ले करियै, जहाँ जसोदा मैया॥
॥ अंतरा 4 ॥
अद्भुत लीला अद्भुत वैभव, साँचौ श्रीशुकदेव कहैया।
आरत व्यास पुकारत बनमें, थोरेई लोग सुनैया॥