॥ अंतरा 1 ॥
हर सांस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बित जाये जीवन मेरा,
तेरी पूजा करते बीते साँझ सवेरा,
यूँ बित जाये जीवन मेरा ॥
नैनों की खिड़की से तुमको,
पल पल में निहारूँ,
मन में बिठा लूँ तेरी आरती उतारूँ,
डाले रहूँ तेरे चरणों में डेरा,
यूँ बित जाये जीवन मेरा ॥
॥ अंतरा 2 ॥
जो भी तेरा प्यारा हो वो,
मेरे दिल का प्यारा हो,
मेरे सर का ताज मेरी आँखों का तारा हो,
सब में निहारूँ रूप सुनहरा,
यूँ बित जाये जीवन मेरा ॥
॥ अंतरा 3 ॥
प्यार हो सत्कार हो ऐतबार हो तुम्हारा,
सुख भी हो सारे और याद हो इशारा,
हो आत्मा पे तेरा ही डेरा,
यूँ बित जाये जीवन मेरा ॥
॥ अंतरा 4 ॥
हर सांस में हो सुमिरन तेरा,
यूँ बित जाये जीवन मेरा,
तेरी पूजा करते बीते साँझ सवेरा,
यूँ बित जाये जीवन मेरा ॥