॥ अंतरा 1 ॥
वो पहली बार वृंदावन,
का जाना याद आता है,
मुझे तो आज भी मंज़र,
सुहाना याद आता है,
वो पहली बार वृंदावन,
का जाना याद आता है ॥
॥ अंतरा 2 ॥
समझ चन्दन लगाई थी,
वो ब्रज रज मैंने माथे पर,
समझ चन्दन लगाई थी,
वो ब्रज रज मैंने माथे पर,
सुखद एहसास वो बरसों,
पुराना याद आता है,
वो पहली बार वृंदावन,
का जाना याद आता है,
मुझे तो आज भी मंज़र,
सुहाना याद आता है ॥
॥ अंतरा 3 ॥
भुलाकर होश दुनिया की,
तेरी चौखट पे बैठा था,
भुलाकर होश दुनिया की,
तेरी चौखट पे बैठा था,
हजारों में बस एक वो ही,
दीवाना याद आता है,
वो पहली बार वृंदावन,
का जाना याद आता है,
मुझे तो आज भी मंज़र,
सुहाना याद आता है ॥
॥ अंतरा 4 ॥
तुझे देखा तो बस हम,
देखते ही रह गए तुमको,
तुझे देखा तो बस हम,
देखते ही रह गए तुमको,
नज़र से हाले दिल तुमको,
सुनाना याद आता है,
वो पहली बार वृंदावन,
का जाना याद आता है,
मुझे तो आज भी मंज़र,
सुहाना याद आता है ॥
॥ अंतरा 5 ॥
बसा के मन के मंदिर में,
युगल सरकार की झांकी,
बसा के मन के मंदिर में,
युगल सरकार की झांकी,
लिखा जो 'शांत' ने उस पल,
तराना याद आता है,
वो पहली बार वृंदावन,
का जाना याद आता है,
मुझे तो आज भी मंज़र,
सुहाना याद आता है ॥
॥ अंतरा 6 ॥
वो पहली बार वृंदावन,
का जाना याद आता है,
मुझे तो आज भी मंज़र,
सुहाना याद आता है,
वो पहली बार वृंदावन,
का जाना याद आता है ॥