॥ अंतरा 1 ॥
गोकुल में देखो, वृंदावन में देखो, मुरली बाजे रे
श्याम संग राधा नाचे रे
॥ अंतरा 2 ॥
चन्द्र किरण सा श्याम सलोना, दोई आँखे कजरारी
ठुमक ठुमक नाचे, गोपियन के संग, जग का पालन हारी
सार बिहारी संग राधा सुकुमारी, ब्रिज में विराजे रे,
श्याम संग राधा नाचे रे...
॥ अंतरा 3 ॥
छम छम नाचे राधे रानी सुन कर मीठी मुरलिया
श्याम छवि पर सब बलिहारी ग्वाल बाल और गईया
सरल सरल चाले रे मधुरी पुरवइया रे, मेघा गरजे रे,
श्याम संग राधा नाचे रे...
॥ अंतरा 4 ॥
यमुना तट पर वंसी वट पर कान्हा रास रचाए
गोपी बन कर शंकर आए, गोपेशवर कहलाए
डम डम डमरू बाजे, कान्हा की मुरली पै, सब जग नाचे
श्याम संग रहा नाचे रे...
॥ अंतरा 5 ॥
रास रचो है, रास रचो है, यमुना के तट हरी रास रच्यो है
राधा नाचे कृष्णा नाचे नाचे गोपी जन
मन मेरो बन गयो ऋ सखी पावन वृंदावन
रास रचो है, रास रचो है, यमुना के तट हरी रास रच्यो है